श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 65: विश्वामित्र की घोर तपस्या, उन्हें ब्राह्मणत्व की प्राप्ति तथा राजा जनक का उनकी प्रशंसा करके उनसे विदा ले राजभवन को लौटना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  1.65.6 
तस्मै दत्त्वा तदा सिद्धं सर्वं विप्राय निश्चित:।
नि:शेषितेऽन्ने भगवानभुक्त्वैव महातपा:॥ ६॥
 
 
अनुवाद
तब उन्होंने अपना बनाया हुआ सारा भोजन उस ब्राह्मण को देने का निश्चय किया और उसे दे दिया। उस भोजन में से कुछ भी शेष नहीं रहा। अतएव वे महातपस्वी भगवान विश्वामित्र बिना खाए-पिए ही रह गए॥6॥
 
Then he decided to give all the food he had prepared to that Brahmin and gave it to him. Nothing of that food was left. Therefore that great ascetic Bhagwan Viswamitra remained without eating or drinking.॥ 6॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd