vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
»
काण्ड 1: बाल काण्ड
»
सर्ग 65: विश्वामित्र की घोर तपस्या, उन्हें ब्राह्मणत्व की प्राप्ति तथा राजा जनक का उनकी प्रशंसा करके उनसे विदा ले राजभवन को लौटना
»
श्लोक 36
श्लोक
1.65.36
तृप्तिराश्चर्यभूतानां कथानां नास्ति मे विभो।
कर्मकालो मुनिश्रेष्ठ लम्बते रविमण्डलम्॥ ३६॥
अनुवाद
'भगवन्! आपकी अद्भुत कथाएँ सुनकर मैं तृप्त नहीं हुआ; परन्तु हे मुनि! यज्ञ का समय हो गया है, सूर्य अस्त हो रहा है।
'Lord! I am not satisfied with listening to your wonderful stories; but, O great sage! It is time for the yagya, the sun is setting.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×