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ramayan 1.65.33-34: 'आपके दर्शन से मुझे बहुत लाभ हुआ, अनेक प्रकार के गुण प्राप्त हुए। ब्रह्मन्! आज इस सभा में आकर मैंने महात्मा राम तथा अन्य सभासदों के साथ आपके महान तेज (प्रभाव) का वर्णन सुना है, अनेक गुणों का श्रवण किया है। ब्रह्मन्! शतानन्दजी ने आपके महान तप की कथा विस्तारपूर्वक कही है। 33-34॥   |   ramayan सर्ग 1.65: विश्वामित्र की घोर तपस्या, उन्हें ब्राह्मणत्व की प्राप्ति तथा राजा जनक का उनकी प्रशंसा करके उनसे विदा ले राजभवन को लौटना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 65: विश्वामित्र की घोर तपस्या, उन्हें ब्राह्मणत्व की प्राप्ति तथा राजा जनक का उनकी प्रशंसा करके उनसे विदा ले राजभवन को लौटना  »  श्लोक 33-34
 
 
श्लोक  1.65.33-34 
गुणा बहुविधा: प्राप्तास्तव संदर्शनान्मया।
विस्तरेण च वै ब्रह्मन् कीर्त्यमानं महत्तप:॥ ३३॥
श्रुतं मया महातेजो रामेण च महात्मना।
सदस्यै: प्राप्य च सद: श्रुतास्ते बहवो गुणा:॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
'आपके दर्शन से मुझे बहुत लाभ हुआ, अनेक प्रकार के गुण प्राप्त हुए। ब्रह्मन्! आज इस सभा में आकर मैंने महात्मा राम तथा अन्य सभासदों के साथ आपके महान तेज (प्रभाव) का वर्णन सुना है, अनेक गुणों का श्रवण किया है। ब्रह्मन्! शतानन्दजी ने आपके महान तप की कथा विस्तारपूर्वक कही है। 33-34॥
 
'I got a lot of benefit from your darshan, I acquired many types of qualities. Brahman! Today, coming to this meeting, I along with Mahatma Ram and other members have heard the description of your great brilliance (influence), I have heard many qualities. Brahman! Shatanandji has narrated the story of your great penance in detail. 33-34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)