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ramayan 1.65.26: ‘मुनि! इसमें संदेह नहीं है कि आप ब्रह्मर्षि हो गए हैं। आपके समस्त ब्राह्मण-अनुष्ठान पूर्ण हो गए हैं।’ ऐसा कहकर समस्त देवता जिस प्रकार आए थे, उसी प्रकार लौट गए॥ 26॥   |   ramayan सर्ग 1.65: विश्वामित्र की घोर तपस्या, उन्हें ब्राह्मणत्व की प्राप्ति तथा राजा जनक का उनकी प्रशंसा करके उनसे विदा ले राजभवन को लौटना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 65: विश्वामित्र की घोर तपस्या, उन्हें ब्राह्मणत्व की प्राप्ति तथा राजा जनक का उनकी प्रशंसा करके उनसे विदा ले राजभवन को लौटना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  1.65.26 
ब्रह्मर्षिस्त्वं न संदेह: सर्वं सम्पद्यते तव।
इत्युक्त्वा देवताश्चापि सर्वा जग्मुर्यथागतम्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
‘मुनि! इसमें संदेह नहीं है कि आप ब्रह्मर्षि हो गए हैं। आपके समस्त ब्राह्मण-अनुष्ठान पूर्ण हो गए हैं।’ ऐसा कहकर समस्त देवता जिस प्रकार आए थे, उसी प्रकार लौट गए॥ 26॥
 
‘Muni! There is no doubt that you have become a Brahmarshi. All your brahminical rituals have been completed.’ Saying this, all the gods returned the same way they had come.॥ 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)