Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 1.65.25: तब देवताओं ने मन्त्र जपने वालों में श्रेष्ठ वसिष्ठ मुनि को प्रसन्न किया। इसके बाद ब्रह्मर्षि वशिष्ठ ने 'एवमस्तु' कहकर विश्वामित्र का ब्रह्मर्षि होना स्वीकार कर लिया और उनसे मित्रता स्थापित कर ली। 25॥ | ramayan सर्ग 1.65: विश्वामित्र की घोर तपस्या, उन्हें ब्राह्मणत्व की प्राप्ति तथा राजा जनक का उनकी प्रशंसा करके उनसे विदा ले राजभवन को लौटना । ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तब देवताओं ने मन्त्र जपने वालों में श्रेष्ठ वसिष्ठ मुनि को प्रसन्न किया। इसके बाद ब्रह्मर्षि वशिष्ठ ने 'एवमस्तु' कहकर विश्वामित्र का ब्रह्मर्षि होना स्वीकार कर लिया और उनसे मित्रता स्थापित कर ली। 25॥
Then the gods pleased Vasistha Muni, the best among those who chanted mantras. After this, Brahmarshi Vashishtha accepted Vishwamitra's status as Brahmarshi by saying 'Evamastu' and established friendship with him. 25॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥