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ramayan 1.65.21-22h: पितामह ब्रह्माजी के ये वचन सुनकर महामुनि विश्वामित्र अत्यंत प्रसन्न हुए और उन्होंने सब देवताओं को प्रणाम करके कहा- ॥21 1/2॥   |   ramayan सर्ग 1.65: विश्वामित्र की घोर तपस्या, उन्हें ब्राह्मणत्व की प्राप्ति तथा राजा जनक का उनकी प्रशंसा करके उनसे विदा ले राजभवन को लौटना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 65: विश्वामित्र की घोर तपस्या, उन्हें ब्राह्मणत्व की प्राप्ति तथा राजा जनक का उनकी प्रशंसा करके उनसे विदा ले राजभवन को लौटना  »  श्लोक 21-22h
 
 
श्लोक  1.65.21-22h 
पितामहवच: श्रुत्वा सर्वेषां त्रिदिवौकसाम्॥ २१॥
कृत्वा प्रणामं मुदितो व्याजहार महामुनि:।
 
 
अनुवाद
पितामह ब्रह्माजी के ये वचन सुनकर महामुनि विश्वामित्र अत्यंत प्रसन्न हुए और उन्होंने सब देवताओं को प्रणाम करके कहा- ॥21 1/2॥
 
Hearing these words of Grandfather Brahmaji, the great sage Vishwamitra became extremely happy and bowed to all the gods and said – ॥ 21 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)