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ramayan 1.65.19-20h: ब्रह्मर्षि! आपका स्वागत है, हम आपकी तपस्या से अत्यन्त प्रसन्न हैं। कुशिकानन्दन! आपने घोर तप करके ब्राह्मणत्व प्राप्त किया है॥19 1/2॥   |   ramayan सर्ग 1.65: विश्वामित्र की घोर तपस्या, उन्हें ब्राह्मणत्व की प्राप्ति तथा राजा जनक का उनकी प्रशंसा करके उनसे विदा ले राजभवन को लौटना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 65: विश्वामित्र की घोर तपस्या, उन्हें ब्राह्मणत्व की प्राप्ति तथा राजा जनक का उनकी प्रशंसा करके उनसे विदा ले राजभवन को लौटना  »  श्लोक 19-20h
 
 
श्लोक  1.65.19-20h 
ब्रह्मर्षे स्वागतं तेऽस्तु तपसा स्म सुतोषिता:॥ १९॥
ब्राह्मण्यं तपसोग्रेण प्राप्तवानसि कौशिक।
 
 
अनुवाद
ब्रह्मर्षि! आपका स्वागत है, हम आपकी तपस्या से अत्यन्त प्रसन्न हैं। कुशिकानन्दन! आपने घोर तप करके ब्राह्मणत्व प्राप्त किया है॥19 1/2॥
 
‘Brahmarshi! You are welcome, we are very pleased with your penance. Kushikanandan! You have attained brahminhood by your intense penance.॥ 19 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)