श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 64: विश्वामित्र का रम्भा को शाप देकर पुनः घोर तपस्या के लिये दीक्षा लेना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  1.64.2 
तथोक्ता साप्सरा राम सहस्राक्षेण धीमता।
व्रीडिता प्राञ्जलिर्वाक्यं प्रत्युवाच सुरेश्वरम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
हे श्री राम! बुद्धिमान इन्द्र के ऐसा कहने पर वह अप्सरा लज्जित हो गई और हाथ जोड़कर इन्द्रदेव से बोली -॥2॥
 
Shri Ram! When the wise Indra said this, the Apsara became ashamed and with folded hands said to Lord Indra -॥ 2॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas