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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 1: बाल काण्ड
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सर्ग 61: विश्वामित्र की पुष्कर तीर्थ में तपस्या तथा राजर्षि अम्बरीष का ऋचीक के मध्यम पुत्र शुनःशेप को यज्ञ-पशु बनाने के लिये खरीदकर लाना
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श्लोक 16-17h
श्लोक
1.61.16-17h
ऋचीकस्य वच: श्रुत्वा तेषां माता महात्मनाम्॥ १६॥
उवाच नरशार्दूलमम्बरीषमिदं वच:।
अनुवाद
ऋचीक मुनि के वचन सुनकर उन श्रेष्ठ पुत्रों की माता मानसिंह अम्बरीष से इस प्रकार बोलीं-॥16 1/2॥
After listening to the words of the sage Richik, the mother of those great sons spoke to the man-singh Ambarish thus -॥ 16 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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