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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
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काण्ड 1: बाल काण्ड
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सर्ग 6: राजा दशरथ के शासनकाल में अयोध्या और वहाँ के नागरिकों की उत्तम स्थिति का वर्णन
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श्लोक 8
श्लोक
1.6.8
कामी वा न कदर्यो वा नृशंस: पुरुष: क्वचित्।
द्रष्टुं शक्यमयोध्यायां नाविद्वान् न च नास्तिक:॥ ८॥
अनुवाद
अयोध्या में कहीं भी कोई कामी, कृपण, क्रूर, मूर्ख या नास्तिक व्यक्ति दिखाई नहीं देता था।॥8॥
No lustful, miserly, cruel, foolish or atheist person was to be seen anywhere in Ayodhya. ॥ 8॥
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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