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ramayan 1.59.3: 'राजन्! मैं आपके यज्ञ में सहायता करने वाले सभी पुण्यात्मा महर्षियों को आमंत्रित करता हूँ। फिर आप प्रसन्नतापूर्वक यज्ञ करें।'   |   ramayan सर्ग 1.59: विश्वामित्र का त्रिशंकु का यज्ञ कराने के लिये ऋषिमुनियों को आमन्त्रित करना और उनकी बात न मानने वाले महोदय तथा ऋषिपुत्रों को शाप देकर नष्ट करना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 59: विश्वामित्र का त्रिशंकु का यज्ञ कराने के लिये ऋषिमुनियों को आमन्त्रित करना और उनकी बात न मानने वाले महोदय तथा ऋषिपुत्रों को शाप देकर नष्ट करना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  1.59.3 
अहमामन्त्रये सर्वान् महर्षीन् पुण्यकर्मण:।
यज्ञसाह्यकरान् राजंस्ततो यक्ष्यसि निर्वृत:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
'राजन्! मैं आपके यज्ञ में सहायता करने वाले सभी पुण्यात्मा महर्षियों को आमंत्रित करता हूँ। फिर आप प्रसन्नतापूर्वक यज्ञ करें।'
 
'King! I invite all the virtuous Maharishis who help in your Yagya. Then you perform the yajna happily. 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)