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ramayan 1.59.13-15h: वे कहते हैं कि जो चाण्डाल है और जिसका आचार्य क्षत्रिय है, उसके यज्ञ का हविष्य कोई ऋषि या श्रेष्ठ ब्राह्मण कैसे खा सकता है? अथवा विश्वामित्र द्वारा पाला गया ब्राह्मण चाण्डाल का अन्न खाकर स्वर्ग कैसे जा सकता है?॥13-14 1/2॥   |   ramayan सर्ग 1.59: विश्वामित्र का त्रिशंकु का यज्ञ कराने के लिये ऋषिमुनियों को आमन्त्रित करना और उनकी बात न मानने वाले महोदय तथा ऋषिपुत्रों को शाप देकर नष्ट करना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 59: विश्वामित्र का त्रिशंकु का यज्ञ कराने के लिये ऋषिमुनियों को आमन्त्रित करना और उनकी बात न मानने वाले महोदय तथा ऋषिपुत्रों को शाप देकर नष्ट करना  »  श्लोक 13-15h
 
 
श्लोक  1.59.13-15h 
क्षत्रियो याजको यस्य चण्डालस्य विशेषत:॥ १३॥
कथं सदसि भोक्तारो हविस्तस्य सुरर्षय:।
ब्राह्मणा वा महात्मानो भुक्त्वा चाण्डालभोजनम्॥ १४॥
कथं स्वर्गं गमिष्यन्ति विश्वामित्रेण पालिता:।
 
 
अनुवाद
वे कहते हैं कि जो चाण्डाल है और जिसका आचार्य क्षत्रिय है, उसके यज्ञ का हविष्य कोई ऋषि या श्रेष्ठ ब्राह्मण कैसे खा सकता है? अथवा विश्वामित्र द्वारा पाला गया ब्राह्मण चाण्डाल का अन्न खाकर स्वर्ग कैसे जा सकता है?॥13-14 1/2॥
 
‘They say, how can a sage or a great Brahmin eat the offerings in the yagya of one who is a Chandala and whose acharya is a Kshatriya? Or how can a Brahmin brought up by Vishwamitra go to heaven after eating the food of a Chandala?’॥13-14 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)