Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 1.58.6-8h: गुरुपुत्रों के क्रोध भरे वचन सुनकर राजा त्रिशंकु ने उनसे पुनः कहा - 'हे तपस्वियों! भगवान वसिष्ठ ने तो मुझे पहले ही अस्वीकार कर दिया था, आप गुरुपुत्र भी मेरी प्रार्थना स्वीकार नहीं कर रहे हैं; अतः आपका कल्याण हो, अब मैं किसी अन्य की शरण में जाता हूँ।' | ramayan सर्ग 1.58: वसिष्ठ ऋषि के पुत्रों का त्रिशंकु को शाप-प्रदान, उनके शाप से चाण्डाल हुए त्रिशंकु का विश्वामित्रजी की शरण में जाना । ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
गुरुपुत्रों के क्रोध भरे वचन सुनकर राजा त्रिशंकु ने उनसे पुनः कहा - 'हे तपस्वियों! भगवान वसिष्ठ ने तो मुझे पहले ही अस्वीकार कर दिया था, आप गुरुपुत्र भी मेरी प्रार्थना स्वीकार नहीं कर रहे हैं; अतः आपका कल्याण हो, अब मैं किसी अन्य की शरण में जाता हूँ।'
Hearing the angry words of the Guru's sons, King Trisanku again said to them - 'O ascetics! Lord Vasishtha had already rejected me, you Guru's sons are also not accepting my request; so may you be blessed, now I will go to someone else for shelter.'
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥