Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
ramayan 1.58.3: ‘इक्ष्वाकु वंश के समस्त क्षत्रियों के लिए पुरोहित वसिष्ठ ही परम मोक्ष हैं। उन सत्यनिष्ठ महात्मा के वचनों का कोई खंडन नहीं कर सकता।॥3॥   |   ramayan सर्ग 1.58: वसिष्ठ ऋषि के पुत्रों का त्रिशंकु को शाप-प्रदान, उनके शाप से चाण्डाल हुए त्रिशंकु का विश्वामित्रजी की शरण में जाना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 58: वसिष्ठ ऋषि के पुत्रों का त्रिशंकु को शाप-प्रदान, उनके शाप से चाण्डाल हुए त्रिशंकु का विश्वामित्रजी की शरण में जाना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  1.58.3 
इक्ष्वाकूणां हि सर्वेषां पुरोधा: परमा गति:।
न चातिक्रमितुं शक्यं वचनं सत्यवादिन:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
‘इक्ष्वाकु वंश के समस्त क्षत्रियों के लिए पुरोहित वसिष्ठ ही परम मोक्ष हैं। उन सत्यनिष्ठ महात्मा के वचनों का कोई खंडन नहीं कर सकता।॥3॥
 
‘For all the Kshatriyas of the Ikshvaku clan, the priest Vasishtha is the ultimate salvation. No one can deny the words of that truthful Mahatma.॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)