Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 ramayan 1.58.11-13h: श्री राम! अपने राजा को चाण्डाल रूप में देखकर उसके साथ आये हुए सभी मंत्री और नगरवासी उसे छोड़कर भाग गये। ककुत्स्थानन्दन! वह धैर्यवान राजा दिन-रात चिन्ता की अग्नि में जलने लगा और अकेला ही तपस्वी विश्वामित्र के पास गया। | ramayan सर्ग 1.58: वसिष्ठ ऋषि के पुत्रों का त्रिशंकु को शाप-प्रदान, उनके शाप से चाण्डाल हुए त्रिशंकु का विश्वामित्रजी की शरण में जाना । ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड । श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
तं दृष्ट्वा मन्त्रिण: सर्वे त्यज्य चण्डालरूपिणम्॥ ११॥
प्राद्रवन् सहिता राम पौरा येऽस्यानुगामिन:।
एको हि राजा काकुत्स्थ जगाम परमात्मवान्॥ १२॥
दह्यमानो दिवारात्रं विश्वामित्रं तपोधनम्।
अनुवाद
श्री राम! अपने राजा को चाण्डाल रूप में देखकर उसके साथ आये हुए सभी मंत्री और नगरवासी उसे छोड़कर भाग गये। ककुत्स्थानन्दन! वह धैर्यवान राजा दिन-रात चिन्ता की अग्नि में जलने लगा और अकेला ही तपस्वी विश्वामित्र के पास गया।
Shri Ram! On seeing their king in the form of a Chandala, all the ministers and the citizens of the city who had come with him, left him and ran away. Kakutsthanandan! That patient-natured king started burning in the fire of worry day and night and went alone to the ascetic Vishwamitra.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥