श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 57: विश्वामित्र की तपस्या, राजा त्रिशंकु का यज्ञ के लिये वसिष्ठजी से प्रार्थना करना,उनके इन्कार करने पर उन्हीं के पुत्रों की शरण में जाना  »  श्लोक 6-7h
 
 
श्लोक  1.57.6-7h 
एवमुक्त्वा महातेजा जगाम सह दैवतै:॥ ६॥
त्रिविष्टपं ब्रह्मलोकं लोकानां परमेश्वर:।
 
 
अनुवाद
ऐसा कहकर सम्पूर्ण लोकों के स्वामी ब्रह्माजी देवताओं के साथ स्वर्गलोक से होते हुए ब्रह्मलोक को चले गए ॥6 1/2॥
 
Saying this, Brahmaji, the Lord of all the worlds, went to Brahmalok via heaven along with the gods. 6 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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