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श्लोक 1.57.22  |
इक्ष्वाकूणां हि सर्वेषां पुरोधा: परमा गति:।
तस्मादनन्तरं सर्वे भवन्तो दैवतं मम॥ २२॥ |
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| अनुवाद |
| 'समस्त इक्ष्वाकु वंश के लिए पुरोहित वसिष्ठजी ही परम मोक्ष हैं। उनके बाद तुम सब मेरे परम देव हो।'॥22॥ |
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| 'For all the Ikshwaku clan, priest Vasishthaji is the ultimate salvation. After him, all of you are my ultimate deities.'॥ 22॥ |
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इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये बालकाण्डे सप्तपञ्चाश: सर्ग:॥ ५७॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके बालकाण्डमें सत्तावनवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ ५७॥ |
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