श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 56: विश्वामित्र द्वारा वसिष्ठजी पर नाना प्रकार के दिव्यास्त्रों का प्रयोग,वसिष्ठ द्वारा ब्रह्मदण्ड से ही उनका शमन,विश्वामित्र का ब्राह्मणत्व की प्राप्ति के लिये तप करने का निश्चय  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  1.56.5 
तस्यास्त्रं गाधिपुत्रस्य घोरमाग्नेयमुत्तमम्।
ब्रह्मदण्डेन तच्छान्तमग्नेर्वेग इवाम्भसा॥ ५॥
 
 
अनुवाद
गाधिपुत्र विश्वामित्र का वह उत्तम एवं भयंकर आग्नेयास्त्र वसिष्ठजी के ब्रह्मदण्ड से उसी प्रकार शान्त हो गया, जैसे जल के गिरने से जलती हुई अग्नि का वेग शान्त हो जाता है॥5॥
 
That excellent and fierce fire weapon of Gadhi's son Vishwamitra was calmed down by Vasisthaji's Brahmadanda in the same way as the speed of burning fire is quenched by the falling of water. 5॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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