श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 55: अपने सौ पुत्रों और सारी सेना के नष्ट हो जाने पर विश्वामित्र का तपस्या करके दिव्यास्त्र पाना, वसिष्ठजी का ब्रह्मदण्ड लेकर उनके सामने खड़ा होना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  1.55.3 
योनिदेशाच्च यवना: शकृद्देशाच्छका: स्मृता:।
रोमकूपेषु म्लेच्छाश्च हारीता: सकिरातका:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
'योनि से यवन उत्पन्न हुए और शकृद्देश (गोबर) से शक उत्पन्न हुए। रोमछिद्रों से म्लेच्छ, हारित और किरात उत्पन्न हुए ॥3॥
 
‘Yavan arose from the vagina and Shakas arose from the Shakriddesh (place of cow dung). From the pores appeared Mlechchha, Harit and Kirat. 3॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd