श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 54: विश्वामित्र का वसिष्ठजी की गौ को बलपूर्वक ले जाना, गौ का दुःखी होकर वसिष्ठजी से इसका कारण पूछना, विश्वामित्रजी की सेना का संहार करना  »  श्लोक 6-7
 
 
श्लोक  1.54.6-7 
जगामानिलवेगेन पादमूलं महात्मन:॥ ६॥
शबला सा रुदन्ती च क्रोशन्ती चेदमब्रवीत्।
वसिष्ठस्याग्रत: स्थित्वा रुदन्ती मेघनि:स्वना॥ ७॥
 
 
अनुवाद
वह शबला गाय वायु के वेग से उन महात्मा के चरणों में गई और उनके सामने खड़ी होकर मेघ के समान गम्भीर वाणी में रोती और विलाप करती हुई इस प्रकार बोली -॥6-7॥
 
That Shabla cow went to the feet of that great soul with the speed of the wind and standing before him spoke to him in a voice as deep as that of a cloud, weeping and wailing as follows -॥ 6-7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)