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ramayan 1.53.7: 'अमात्य अपने मन्त्रियों और सेवकों सहित पूजित होकर अत्यन्त प्रसन्न हुए और वशिष्ठजी से इस प्रकार बोले -   |   ramayan सर्ग 1.53: विश्वामित्र का वसिष्ठ से उनकी कामधेनु को माँगना और उनका देने से अस्वीकार करना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 53: विश्वामित्र का वसिष्ठ से उनकी कामधेनु को माँगना और उनका देने से अस्वीकार करना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  1.53.7 
सामात्यो मन्त्रिसहित: सभृत्य: पूजितस्तदा।
युक्त: परमहर्षेण वसिष्ठमिदमब्रवीत्॥ ७॥
 
 
अनुवाद
'अमात्य अपने मन्त्रियों और सेवकों सहित पूजित होकर अत्यन्त प्रसन्न हुए और वशिष्ठजी से इस प्रकार बोले -
 
'Amatya, along with his ministers and servants, being worshipped, he became very happy and spoke to Vashishthaji like this -
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)