श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 53: विश्वामित्र का वसिष्ठ से उनकी कामधेनु को माँगना और उनका देने से अस्वीकार करना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  1.53.5 
सर्वमासीत् सुसंतुष्टं हृष्टपुष्टजनायुतम्।
विश्वामित्रबलं राम वसिष्ठेन सुतर्पितम्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
'श्रीराम! महर्षि वसिष्ठ ने विश्वामित्र की सम्पूर्ण सेना के लोगों को भली-भाँति तृप्त किया। उस सेना में अनेक स्वस्थ और बलवान सैनिक थे। वे सभी उस दिव्य भोजन को पाकर अत्यंत तृप्त हुए॥5॥
 
‘Shri Ram! Maharishi Vasishtha thoroughly satisfied the people of Vishwamitra's entire army. There were many healthy and robust soldiers in that army. All of them were very satisfied after having that divine food.॥ 5॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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