श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 53: विश्वामित्र का वसिष्ठ से उनकी कामधेनु को माँगना और उनका देने से अस्वीकार करना  »  श्लोक 25
 
 
श्लोक  1.53.25 
अतोमूला: क्रिया: सर्वा मम राजन् न संशय:।
बहुना किं प्रलापेन न दास्ये कामदोहिनीम्॥ २५॥
 
 
अनुवाद
'नरेश्वर! यह मेरे समस्त शुभ कर्मों का मूल है, इसमें संशय नहीं है। व्यर्थ की बातें अधिक करने से क्या लाभ? मैं इस कामधेनु को कभी नहीं दूँगा'॥25॥
 
'Nareshwar! This is the root of all my good deeds, there is no doubt about it. What is the use of talking too much in vain. I will never give away this Kamadhenu'॥ 25॥
 
इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये बालकाण्डे त्रिपञ्चाश: सर्ग:॥ ५३॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके बालकाण्डमें तिरपनवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ ५३॥
 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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