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ramayan 1.53.24: हे राजन! मेरा दर्शन, पूर्णमास, प्रचुर दक्षिणा सहित यज्ञ और नाना प्रकार के पुण्यकर्म - यह गौ ही मेरी है। सब कुछ इसी पर निर्भर है॥ 24॥   |   ramayan सर्ग 1.53: विश्वामित्र का वसिष्ठ से उनकी कामधेनु को माँगना और उनका देने से अस्वीकार करना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 53: विश्वामित्र का वसिष्ठ से उनकी कामधेनु को माँगना और उनका देने से अस्वीकार करना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  1.53.24 
दर्शश्च पौर्णमासश्च यज्ञाश्चैवाप्तदक्षिणा:।
एतदेव हि मे राजन् विविधाश्च क्रियास्तथा॥ २४॥
 
 
अनुवाद
हे राजन! मेरा दर्शन, पूर्णमास, प्रचुर दक्षिणा सहित यज्ञ और नाना प्रकार के पुण्यकर्म - यह गौ ही मेरी है। सब कुछ इसी पर निर्भर है॥ 24॥
 
‘O King! My darshan, the full month, the sacrifices with abundant dakshina and various pious deeds – this cow is all that is mine. Everything depends on it.॥ 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)