श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 53: विश्वामित्र का वसिष्ठ से उनकी कामधेनु को माँगना और उनका देने से अस्वीकार करना  »  श्लोक 15-16h
 
 
श्लोक  1.53.15-16h 
आयत्तमत्र राजर्षे सर्वमेतन्न संशय:।
सर्वस्वमेतत् सत्येन मम तुष्टिकरी तथा॥ १५॥
कारणैर्बहुभी राजन् न दास्ये शबलां तव।
 
 
अनुवाद
'राजन्! इसमें कोई संदेह नहीं कि मेरा सर्वस्व इसी गौ पर निर्भर है। मैं सत्य कहता हूँ - यह गौ ही मेरी सर्वस्व है और मुझे सब प्रकार से संतुष्ट करती है। राजन्! ऐसे अनेक कारण हैं, जिनके कारण मैं आपको यह गौ देने में असमर्थ हूँ।'॥15 1/2॥
 
‘King! There is no doubt that everything of mine is dependent on this cow. I am telling the truth – this cow is my everything and it satisfies me in every way. King! There are many reasons due to which I am unable to give you this cow.'॥ 15 1/2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)