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ramayan 1.53.14: ‘मेरे अग्निहोत्र, बलि, होम, स्वाहा, वषट्कार और नाना प्रकार के ज्ञान सब इस कामधेनु के अधीन हैं।॥14॥   |   ramayan सर्ग 1.53: विश्वामित्र का वसिष्ठ से उनकी कामधेनु को माँगना और उनका देने से अस्वीकार करना   ।   ramayan काण्ड 1: बाल काण्ड   ।   श्रीमद् वाल्मीकि रामायण Srimad Valmiki Ramayana | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 53: विश्वामित्र का वसिष्ठ से उनकी कामधेनु को माँगना और उनका देने से अस्वीकार करना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  1.53.14 
आयत्तमग्निहोत्रं च बलिर्होमस्तथैव च।
स्वाहाकारवषट्कारौ विद्याश्च विविधास्तथा॥ १४॥
 
 
अनुवाद
‘मेरे अग्निहोत्र, बलि, होम, स्वाहा, वषट्कार और नाना प्रकार के ज्ञान सब इस कामधेनु के अधीन हैं।॥14॥
 
‘My Agnihotra, Bali, Homa, Swaha, Vashatkaar and various kinds of knowledge are all under the control of this Kamadhenu.॥ 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)