श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 52: महर्षि वसिष्ठ द्वारा विश्वामित्र का सत्कार और कामधेनु को अभीष्ट वस्तुओं की सृष्टि करने का आदेश  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  1.52.8 
कच्चित्ते सम्भृता भृत्या: कच्चित् तिष्ठन्ति शासने।
कच्चित्ते विजिता: सर्वे रिपवो रिपुसूदन॥ ८॥
 
 
अनुवाद
शत्रुसूदन! क्या आपने अपने सेवकों की अच्छी तरह से देखभाल की है? क्या वे आपकी आज्ञा का पालन करते हैं? क्या आपने अपने सभी शत्रुओं पर विजय प्राप्त कर ली है?
 
‘Shatrusudan! Have you provided for your servants well? Do they obey your command? Have you conquered all your enemies?
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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