श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 52: महर्षि वसिष्ठ द्वारा विश्वामित्र का सत्कार और कामधेनु को अभीष्ट वस्तुओं की सृष्टि करने का आदेश  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  1.52.7 
कच्चित्ते कुशलं राजन् कच्चिद् धर्मेण रञ्जयन्।
प्रजा: पालयसे राजन् राजवृत्तेन धार्मिक॥ ७॥
 
 
अनुवाद
'राजा! क्या आप सकुशल हैं? धर्मात्मा राजा! क्या आप धर्मपूर्वक प्रजा को सुखी रखते हैं और राजसी रीति-नीति का पालन करते हैं? 7॥
 
'King! Are you safe? Righteous king! Do you religiously keep the people happy and follow royal customs and policies? 7॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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