श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 52: महर्षि वसिष्ठ द्वारा विश्वामित्र का सत्कार और कामधेनु को अभीष्ट वस्तुओं की सृष्टि करने का आदेश  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  1.52.20 
एवमुक्तस्तथा तेन वसिष्ठो जपतां वर:।
आजुहाव तत: प्रीत: कल्माषीं धूतकल्मषाम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
राजा के वचन सुनकर महर्षि वशिष्ठ बहुत प्रसन्न हुए। उन्होंने अपनी चित्तीदार गाय को, जिसके पाप (या मैल) धुल गए थे, बुलाया (वह कामधेनु थी)।
 
‘At the king's words, the great sage Vasishtha was very pleased. He called his spotted cow, whose sins (or dirt) had been washed away (it was Kamadhenu).
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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