श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 52: महर्षि वसिष्ठ द्वारा विश्वामित्र का सत्कार और कामधेनु को अभीष्ट वस्तुओं की सृष्टि करने का आदेश  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  1.52.2 
स्वागतं तव चेत्युक्तो वसिष्ठेन महात्मना।
आसनं चास्य भगवान् वसिष्ठो व्यादिदेश ह॥ २॥
 
 
अनुवाद
'तब महात्मा वशिष्ठ ने कहा - 'राजन्! आपका स्वागत है।' ऐसा कहकर भगवान वशिष्ठ ने उन्हें बैठने के लिए आसन दिया॥2॥
 
'Then Mahatma Vashishtha said - 'King! You are welcome.' Saying this, Lord Vashishtha gave him a seat to sit. 2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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