श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 51: शतानन्द को अहल्या के उद्धार का समाचार बताना,शतानन्द द्वारा श्रीराम का अभिनन्दन करते हुए विश्वामित्रजी के पूर्वचरित्र का वर्णन  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  1.51.8 
अपि मे गुरुणा राम: पूजित: कुशिकात्मज।
इहागतो महातेजा: पूजां प्राप्य महात्मन:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
'कुशिकानंदन! क्या मेरे पिता ने भगवान राम की पूजा की थी? क्या ये महाबली भगवान राम उस महात्मा की पूजा स्वीकार करके यहाँ आये हैं?॥8॥
 
‘Kushikanandan! Did my father worship Lord Rama? Has this mighty Lord Rama come here after accepting the worship of that great soul?॥ 8॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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