श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 51: शतानन्द को अहल्या के उद्धार का समाचार बताना,शतानन्द द्वारा श्रीराम का अभिनन्दन करते हुए विश्वामित्रजी के पूर्वचरित्र का वर्णन  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  1.51.5 
अपि रामे महातेजा मम माता यशस्विनी।
वन्यैरुपाहरत् पूजां पूजार्हे सर्वदेहिनाम्॥ ५॥
 
 
अनुवाद
‘क्या मेरी महान् एवं यशस्वी माता अहिल्या ने वन में उत्पन्न फल, पुष्प आदि से समस्त प्राणियों के लिए पूज्य श्री रामचन्द्रजी का पूजन किया था?’॥5॥
 
'Did my great and famous mother Ahalya worship the venerable Shri Ramchandraji for all the living beings with the fruits, flowers etc. grown in the forest? 5॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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