श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 51: शतानन्द को अहल्या के उद्धार का समाचार बताना,शतानन्द द्वारा श्रीराम का अभिनन्दन करते हुए विश्वामित्रजी के पूर्वचरित्र का वर्णन  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  1.51.3 
एतौ निषण्णौ सम्प्रेक्ष्य शतानन्दो नृपात्मजौ।
सुखासीनौ मुनिश्रेष्ठं विश्वामित्रमथाब्रवीत्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
उन दोनों राजकुमारों को सुखपूर्वक बैठे देखकर शतानन्द ने श्रेष्ठ मुनि विश्वामित्र से पूछा : 3॥
 
Seeing those two princes sitting happily, Shatananda asked Vishwamitra, the best sage: 3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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