श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 51: शतानन्द को अहल्या के उद्धार का समाचार बताना,शतानन्द द्वारा श्रीराम का अभिनन्दन करते हुए विश्वामित्रजी के पूर्वचरित्र का वर्णन  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  1.51.21 
कदाचित् तु महातेजा योजयित्वा वरूथिनीम्।
अक्षौहिणीपरिवृत: परिचक्राम मेदिनीम्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
'एक समय की बात है, पराक्रमी राजा विश्वामित्र ने एक सेना एकत्रित की और एक अक्षौहिणी सेना के साथ पृथ्वी पर विचरण करने लगे।
 
‘Once upon a time, the mighty King Visvamitra gathered an army and started roaming the Earth with an Akshauhini army.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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