श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 51: शतानन्द को अहल्या के उद्धार का समाचार बताना,शतानन्द द्वारा श्रीराम का अभिनन्दन करते हुए विश्वामित्रजी के पूर्वचरित्र का वर्णन  »  श्लोक 16
 
 
श्लोक  1.51.16 
श्रूयतां चाभिधास्यामि कौशिकस्य महात्मन:।
यथाबलं यथातत्त्वं तन्मे निगदत: शृणु॥ १६॥
 
 
अनुवाद
मैं महात्मा कौशिक के वास्तविक स्वरूप और बल का वर्णन कर रहा हूँ। कृपया यह सब मुझसे ध्यानपूर्वक सुनिए॥16॥
 
'I am describing the true nature and strength of Mahatma Kaushik. Please listen to all this from me carefully.॥ 16॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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