श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 51: शतानन्द को अहल्या के उद्धार का समाचार बताना,शतानन्द द्वारा श्रीराम का अभिनन्दन करते हुए विश्वामित्रजी के पूर्वचरित्र का वर्णन  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  1.51.13 
स्वागतं ते नरश्रेष्ठ दिष्टॺा प्राप्तोऽसि राघव।
विश्वामित्रं पुरस्कृत्य महर्षिमपराजितम्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
'पुरुषोत्तम! आपका हार्दिक स्वागत है। रघुनन्दन! मैं बड़ा भाग्यशाली हूँ कि आपने अजेय ऋषि विश्वामित्र को इस स्थान तक पहुँचाने का कष्ट उठाया।॥13॥
 
'Best of men! You are most welcome. Raghunandan! I am very fortunate that you took the trouble of leading the invincible sage Vishwamitra to this place.॥ 13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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