श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 50: राम आदि का मिथिला-गमन, राजा जनक द्वारा विश्वामित्र का सत्कार तथा उनका श्रीराम और लक्ष्मण के विषय में परिचय पाना  »  श्लोक 9-10h
 
 
श्लोक  1.50.9-10h 
स तांश्चाथ मुनीन् पृष्ट्वा सोपाध्यायपुरोधस:॥ ९॥
यथार्हमृषिभि: सर्वै: समागच्छत् प्रहृष्टवत्।
 
 
अनुवाद
राजा के साथ आए हुए ऋषियों, उपाध्यायों और पुरोहितों का कुशलक्षेम पूछकर विश्वामित्र बड़े प्रसन्नतापूर्वक उन सब महात्माओं से मिले ॥9 1/2॥
 
After inquiring about the well-being of the sages, Upadhyayas and priests who had accompanied the King, Visvamitra met all those great sages with great joy. ॥9 1/2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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