श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 50: राम आदि का मिथिला-गमन, राजा जनक द्वारा विश्वामित्र का सत्कार तथा उनका श्रीराम और लक्ष्मण के विषय में परिचय पाना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  1.50.22 
तस्य तद् वचनं श्रुत्वा जनकस्य महात्मन:।
न्यवेदयदमेयात्मा पुत्रौ दशरथस्य तौ॥ २२॥
 
 
अनुवाद
महात्मा जनक का यह प्रश्न सुनकर अत्यन्त आत्मविश्वास से भरे हुए विश्वामित्रजी बोले - 'राजन्! ये दोनों महाराज दशरथ के पुत्र हैं।'
 
Hearing this question of Mahatma Janak, Vishwamitraji, full of immense self-confidence, said - 'King! Both of them are the sons of Maharaj Dasharatha. 22॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by acd