श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 50: राम आदि का मिथिला-गमन, राजा जनक द्वारा विश्वामित्र का सत्कार तथा उनका श्रीराम और लक्ष्मण के विषय में परिचय पाना  »  श्लोक 2-3
 
 
श्लोक  1.50.2-3 
रामस्तु मुनिशार्दूलमुवाच सहलक्ष्मण:।
साध्वी यज्ञसमृद्धिर्हि जनकस्य महात्मन:॥ २॥
बहूनीह सहस्राणि नानादेशनिवासिनाम्।
ब्राह्मणानां महाभाग वेदाध्ययनशालिनाम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
वहाँ लक्ष्मण सहित श्री राम ने महर्षि विश्वामित्र से कहा, 'हे महामुनि! महात्मा जनक का यज्ञ-अनुष्ठान अत्यन्त सुन्दर लग रहा है। यहाँ नाना देशों से हजारों ब्राह्मण एकत्रित हुए हैं, जो वेदों का अध्ययन करके शोभायमान हो रहे हैं।॥ 2-3॥
 
There, accompanied by Lakshmana, Shri Ram said to the great sage Vishwamitra, 'O great one! The ceremony of the sacrifice of Mahatma Janaka looks very beautiful. Thousands of Brahmins from various countries have gathered here, who are looking beautiful by studying the Vedas.॥ 2-3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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