श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 50: राम आदि का मिथिला-गमन, राजा जनक द्वारा विश्वामित्र का सत्कार तथा उनका श्रीराम और लक्ष्मण के विषय में परिचय पाना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  1.50.13 
दृष्ट्वा स नृपतिस्तत्र विश्वामित्रमथाब्रवीत्।
अद्य यज्ञसमृद्धिर्मे सफला दैवतै: कृता॥ १३॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात् राजा जनक ने विश्वामित्र की ओर देखकर कहा, 'हे प्रभु! आज देवताओं ने मेरा यज्ञ सफल कर दिया।
 
Thereafter, King Janaka looked at Viswamitra and said, 'O Lord! Today the Gods have made my yagya successful.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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