| श्रीमद् वाल्मीकि रामायण » काण्ड 1: बाल काण्ड » सर्ग 5: राजा दशरथ द्वारा सुरक्षित अयोध्यापुरी का वर्णन » श्लोक 4 |
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| | | | श्लोक 1.5.4  | तदिदं वर्तयिष्याव: सर्वं निखिलमादित:।
धर्मकामार्थसहितं श्रोतव्यमनसूयता॥ ४॥ | | | | | | अनुवाद | | हम दोनों इस सम्पूर्ण काव्य को आदि से अन्त तक गाएँगे। इससे मानव जीवन के चारों पुरुषार्थ - धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष - प्राप्त होते हैं; अतः तुम सब लोग अपने मन की वृत्तियों को त्यागकर इसका श्रवण करो॥ 4॥ | | | | We both will sing this entire poem from beginning to end. Through this, all the four aims of human life - Dharma (righteousness), Artha (wealth), Kama (desire) and Moksha (liberation) are achieved; therefore, you all should listen to it, abandoning your negative thinking.॥ 4॥ | | ✨ ai-generated | | |
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