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श्लोक 1.5.23  |
तामग्निमद्भिर्गुणवद्भिरावृतां
द्विजोत्तमैर्वेदषडंगपारगै:।
सहस्रदै: सत्यरतैर्महात्मभि-
र्महर्षिकल्पै र् ऋषिभिश्च केवलै:॥ २३॥ |
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| अनुवाद |
| अग्निहोत्री, शम-दम आदि उत्तम गुणों से युक्त तथा छहों अंगों सहित सम्पूर्ण वेदों में पारंगत श्रेष्ठ ब्राह्मण उस पुरी को सदैव घेरे रहते थे। वे सहस्त्रों का दान करने वाले तथा सत्य के लिए सदैव तत्पर रहने वाले थे। ऐसे महर्षिकल्प महात्माओं और ऋषियों से अयोध्यापुरी सुशोभित थी और राजा दशरथ उसकी रक्षा करते थे। |
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| The best Brahmins, full of excellent qualities like Agnihotri, Sham-Dum etc. and well-versed in the complete Vedas including all the six organs, always surrounded that Puri. He was a donor of thousands and was always ready for the truth. Ayodhyapuri was adorned with such Maharishikalpa Mahatmas and sages and King Dashrath used to protect it. |
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इत्यार्षे श्रीमद्रामायणे वाल्मीकीये आदिकाव्ये बालकाण्डे पञ्चम: सर्ग:॥ ५॥
इस प्रकार श्रीवाल्मीकिनिर्मित आर्षरामायण आदिकाव्यके बालकाण्डमें पाँचवाँ सर्ग पूरा हुआ॥ ५॥ |
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