श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 5: राजा दशरथ द्वारा सुरक्षित अयोध्यापुरी का वर्णन  »  श्लोक 1-3
 
 
श्लोक  1.5.1-3 
सर्वा पूर्वमियं येषामासीत् कृत्स्ना वसुंधरा।
प्रजापतिमुपादाय नृपाणां जयशालिनाम्॥ १॥
येषां स सगरो नाम सागरो येन खानित:।
षष्टिपुत्रसहस्राणि यं यान्तं पर्यवारयन्॥ २॥
इक्ष्वाकूणामिदं तेषां राज्ञां वंशे महात्मनाम्।
महदुत्पन्नमाख्यानं रामायणमिति श्रुतम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
यह सम्पूर्ण पृथ्वी प्रजापति मनु के समय से लेकर अब तक उन विजयी राजाओं के अधीन रही है, जिन्होंने समुद्र को खोद डाला था और जो भ्रमण करते समय साठ हजार पुत्रों से घिरे रहते थे, जिनके कुल में महाबली राजा सगर उत्पन्न हुए थे, उन्हीं इक्ष्वाकु वंश के महान राजाओं के वंश में रामायण नाम से प्रसिद्ध यह महान ऐतिहासिक काव्य अवतरित हुआ॥1-3॥
 
This entire earth has been under the control of the victorious kings of the dynasty from the time of Prajapati Manu till now, who had the ocean dug out and who used to be surrounded by sixty thousand sons during travels, in whose clan the mighty King Sagar was born, in the lineage of these same great kings of the Ikshvaku lineage this great historical poem, famous as the Ramayana, was incarnated.॥ 1-3॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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