श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 49: इन्द्र को भेड़े के अण्डकोष से युक्त करना,भगवान् श्रीराम के द्वारा अहल्या का उद्धार  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  1.49.9 
तदाप्रभृति काकुत्स्थ पितृदेवा: समागता:।
अफलान् भुञ्जते मेषान् फलैस्तेषामयोजयन्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
ककुत्स्थानन्दन श्री राम! तब से वहाँ आने वाले सभी पितर अण्डकोषरहित भेड़ का ही उपयोग करते हैं और दान करने वालों को अपने दान के फल में भागी बनाते हैं॥9॥
 
Kakutsthanandan Shri Ram! Since then all the ancestors who come there use only the testicle-less sheep and make the donors share in the fruits of their donations.॥ 9॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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