श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 49: इन्द्र को भेड़े के अण्डकोष से युक्त करना,भगवान् श्रीराम के द्वारा अहल्या का उद्धार  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  1.49.8 
अग्नेस्तु वचनं श्रुत्वा पितृदेवा: समागता:।
उत्पाटॺ मेषवृषणौ सहस्राक्षे न्यवेशयन्॥ ८॥
 
 
अनुवाद
अग्निदेव के ये शब्द सुनकर पितृ देवता एकत्रित हुए और उन्होंने भेड़ के अंडकोष उखाड़कर इंद्र के शरीर पर उचित स्थान पर लगा दिए।
 
On hearing these words of Agni, the ancestral gods assembled together and plucked out the testicles of the sheep and attached them at the appropriate place on Indra's body.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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