श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 49: इन्द्र को भेड़े के अण्डकोष से युक्त करना,भगवान् श्रीराम के द्वारा अहल्या का उद्धार  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  1.49.6 
अयं मेष: सवृषण: शक्रो ह्यवृषण: कृत:।
मेषस्य वृषणौ गृह्य शक्रायाशु प्रयच्छत॥ ६॥
 
 
अनुवाद
हे पितरों! आपका यह भेड़ अण्डकोषों से युक्त है और इन्द्र को अण्डकोषविहीन कर दिया गया है। अतः इस भेड़ के दोनों अण्डकोष लेकर यथाशीघ्र इन्द्र को अर्पित कर दीजिए।
 
‘O ancestors! This sheep of yours is equipped with testicles and Indra has been made testicle-less. Therefore, take both the testicles of this sheep and offer them to Indra as soon as possible.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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