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श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 49: इन्द्र को भेड़े के अण्डकोष से युक्त करना,भगवान् श्रीराम के द्वारा अहल्या का उद्धार  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  1.49.4 
तन्मां सुरवरा: सर्वे सर्षिसङ्घा: सचारणा:।
सुरकार्यकरं यूयं सफलं कर्तुमर्हथ॥ ४॥
 
 
अनुवाद
(यदि मैंने उनकी तपस्या में विघ्न न डाला होता, तो वे देवताओं का राज्य छीन लेते। अतः ऐसा करके) मैंने देवताओं का कार्य सिद्ध कर दिया है। अतः हे श्रेष्ठ देवताओं! आप सब ऋषिगण और भाट मिलकर मुझे अण्डकोष के योग्य बनाने का प्रयत्न करें।)॥4॥
 
‘(If I had not disturbed their penance, they would have snatched away the kingdom of the gods. So by doing this) I have accomplished the task of the gods. Therefore, O great gods! All of you, the sages and the bards should together try to make me fit for testicles.'॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)