श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 49: इन्द्र को भेड़े के अण्डकोष से युक्त करना,भगवान् श्रीराम के द्वारा अहल्या का उद्धार  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  1.49.13 
ददर्श च महाभागां तपसा द्योतितप्रभाम्।
लोकैरपि समागम्य दुर्निरीक्ष्यां सुरासुरै:॥ १३॥
 
 
अनुवाद
वहाँ जाकर उन्होंने देखा कि परम सौभाग्यवती अहिल्या अपने तप से शोभायमान हो रही हैं। इस संसार के मनुष्य तथा समस्त देवता और दानव भी वहाँ आकर उन्हें नहीं देख सकते थे॥13॥
 
Going there he saw that the extremely fortunate Ahalya was shining with her penance. Even the humans and all the gods and demons of this world could not come there and see her.॥ 13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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