श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 48: मुनियों सहित श्रीराम का मिथिलापुरी में पहुँचना, विश्वामित्रजी का उनसे अहल्या को शाप प्राप्त होने की कथा सुनाना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  1.48.9 
तत: परमसत्कारं सुमते: प्राप्य राघवौ।
उष्य तत्र निशामेकां जग्मतुर्मिथिलां तत:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
सुमति से उत्तम आतिथ्य पाकर दोनों रघुवंशी कुमार वहाँ एक रात रुके और प्रातःकाल उठकर मिथिला की ओर चल पड़े।
 
Having received great hospitality from Sumati, both the Raghuvanshi Kumars stayed there for a night and in the morning they got up and headed towards Mithila.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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