श्रीमद् वाल्मीकि रामायण  »  काण्ड 1: बाल काण्ड  »  सर्ग 48: मुनियों सहित श्रीराम का मिथिलापुरी में पहुँचना, विश्वामित्रजी का उनसे अहल्या को शाप प्राप्त होने की कथा सुनाना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  1.48.7 
तस्य तद् वचनं श्रुत्वा यथावृत्तं न्यवेदयत्।
सिद्धाश्रमनिवासं च राक्षसानां वधं यथा।
विश्वामित्रवच: श्रुत्वा राजा परमविस्मित:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
सुमति के ये वचन सुनकर विश्वामित्र ने उन्हें पूरी कथा यथावत् सुनाई। उन्होंने सिद्धाश्रम में अपने निवास और राक्षसों के वध की कथा भी यथावत् सुनाई। विश्वामित्र की बातें सुनकर राजा सुमति को बड़ा आश्चर्य हुआ।
 
On hearing these words of Sumati, Vishwamitra narrated the whole story to him in its true form. He also narrated the story of his stay in Siddhashrama and the killing of the demons in its true form. King Sumati was very surprised to hear Vishwamitra's words.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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